हज़रत मियाँ सय्यद खुन्दमीर जब दावत के लिए बैठते थे तो बयान में अक्सर ये अबियात पढ़ते..
अबियात :
खुदा अबिदों में उनको कुबुल करता है
जो खुदा की रह में खुद को नहीं देखते
ख़ाक बन ख़ाक ताके फुल उगे
क्यों के सब के ज़हूर की जगह ख़ाक के सिवा दुसरी चीज़ नहीं
हक़ीकत के जंगल का शेर तु हरगिज़ नहीं बनेगा
जब तक के बाज़ारी कुत्ते की तरह ज़लील ओ ख्वार न फिरे....
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 150)


