हज़रत महेदी अ.स. ने फ़रमाया के मेरी तस्दीक की निशानी ये है के ना-मर्द मर्द होता है यानि तालिब-ए-दुनिया फिर तालिब-ए-खुदा ताला होता है। और बखिल सखी होता है यानि जो शख्स खुदा-ए-ताला की राह में एक दीनार नहीं दे सकता वही शक्स अपनी जान खुदा के हवाले कर देता है। और उम्मी आलिम होता है यानि जो शक्स एक हर्फ़ नहीँ जानता, क़ुरआन के मानी बयान करता है।
(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.16)


