हज़रत महेदी अ.स. हमेशा यानि (हिदायत) फरमाते थे के अपनी ज़ात को खुदा के हवाले करदो किसी शक्स के साथ बातों में मश्गुल मत हो और कोई चीज़ मत चाहो खुदा ए ताला के सिवाए। मखलूक से एक जर्राह की इहतियाज मत रखो।
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 149)