किसी शख्स ने बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. से अर्ज़ किया के...

किसी शख्स ने बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. से अर्ज़ किया के मर्दानगी और बहादुरी इन फकीरों की बुलन्द है।

मियाँ रज़ी ने फ़रमाया के ये फ़ुक़रा ज़ईफ़ हैं खुदा ए ताला के साथ सुलह कर लिए हैं खुदा की ख़ुशनूदी में अपनी ज़ात को खुदा के हवाले कर दिए हैं ।

तुम्हारी बहादुरी बहुत है खुदा और रसुल स.अ.स. और फरिश्तों का मुक़ाबला करते हो और दोज़ख़ का अज़ाब इख़्तियार करते हो तुम्हारी सुजात बड़ी है।

(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 43)

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