हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया के अगर कोई शक़्स बन्दे से कोई नक़्ल करे तो चाहिए के इस नक़्ल को देखे अगर खुदा ए ताला के कलाम के मुवाफ़िक है तो वो (नक़्ल) बन्दे से है और अगर खुदा ए ताला के कलाम के मुवाफ़िक नहीं है तो वो बन्दे से नहीं है या वो शक़्स हमारी बात को समझ न सका।
(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 11)


