हजरत बंदगी मियाँ नूर मुहम्मद खातिम-ए-कार रह. बिदत के तालुक से कहा है के "जो काम और रसम, के खिलाफ-ए-यारां-ए-महेद अलै. (सहाबा-ए-महेदी अलै.) हो चाहे थोडा हो या बहोत, छोटा हो या बड़ा, चाहे मामलात से मुतालक़ हो या इबादत या अतेक़ादत से वह बिदत है।"
(ज़ुबदत-उल-इस्लाम, तस्दीक-ओ-अमल पेज 89)


