चुनांचे मीरां सय्यद महमुद रज़ी. हफ्ता या दो हफ्ते के बाद इज्मा कर के महज़र करते और फरमाते थे के "अगर महेदी अलै. के खिलाफ हमारी ज़ात में कोई बात देखो तो हमारा हाथ पकड़ कर दायरे के बाहर करदो।"

( इंसाफ नामा - मतन शरीफ,  न. 18)
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