हक की तासीर

नकल है हजरत महेदी अलै. ने फ़रमाया के हक की तासीर हिलाल की तरह है, हर रोज़ ज्यादा होती है। और बातिल की तासीर बदर की तरह है, के रोज़ घटती रहती है, यहाँ तक के गायब हो जाती है। अल्लाह ताला फरमाता है के इसी ने भेजा अपने रसूल को हिदायत और सच्चा दीन देकर ताके इसको ग़ालिब करे हर दीन पर अगरचे बुरा लगे मुश्रीकों को।

(2. हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ)

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