शाह नेमत रज़ी. से मनकुल है..

बंदगी मियाँ शाहे नेमत रज़ी. मनकुल है के आप रज़ी. ने हज़रत महेदी अलै. के हुजुर में अर्ज़ किया के अगर हुकुम हो तो कुछ पढूं।

हज़रत महेदी अलै. ने मना किया और फ़रमाया "अगर तुम इल्म पढ़े होते इस बन्दे की महदवीयत को कुबुल न करते।"

(हाशिया इंसाफ  नामा - मतन शरीफ,  न. 1)

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