नेज़ नक़ल है के मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. और मियाँ मखदूम रज़ी. का हुजरा मुतासिल था। मियाँ खुन्दमिर रज़ी. ने मियाँ मखदूम रज़ी. से पूछा के हज़रत महेदी अलै. ने इस आयत का बयान क्या फ़रमाया यानी "बिल गुदुव्वि वल असाल" (सुबह व शाम) (7:205)
इसके बाद मियाँ सय्यद खुन्दमिर ने अफ़सोस किया के हमने किस कदर वक्त जाया किया, जो बाद मग़रिब लैनी गुफ्तगू की। और फ़रमाया " पस जो शक्श मग़रिब के बाद जिक्र के सिवाए लैनी गुफ्तगू करता है ये महेदी अलै. के खिलाफ है।"
(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न.69)


