नेज नक़ल है मुल्ला सय्यद अहमद खुरासानी आलिम था और चंद महिने मीरां सय्यद महेमुद रज़ी. (सानी ए महदी) की सोहबत में रहा था। और चंद साल दूसरे सहाबी रज़ी. की सोहबत में भी रहा था।
एक रोज़ मीरां सय्यद महेमुद रज़ी. से पूछा आप महेदी अलै. के मुनकर को क्या कहते है। आप रज़ी. ने कहा "काफिर" कहतें हैं।
सय्यद अहमद ने कहा के अगर मैं इनकार करूँ तो... आप रज़ी. ने फ़रमाया के अगर बायज़ीद बुस्तामी भी हो और महेदी अलै. का इनकार करें तो काफिर हुए।
(नकलियत बंदगी मियाँ अब्दुल रशीद रह. )


