और (महेदी अलै. ने) फ़रमाया के "तवक्कल वो है के खुदा-ए-ताला की ज़ात पर भरोसा करे और रात दिन इस तलब में रहे के किस वक़्त खुदा को पाऊंगा। पस रिज़्क़ के लिए तवंगरों से तमा और उनकी तवज़े नहीं करनी चाहिए और उनके घरों को नहीं जाना चाहिए और उनके साथ दोस्ती नहीं करनी चाहिए।"
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 22)
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 22)


