और नेज़ नक़ल है हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया के "अगर तू किसी वक़्त एक हांडी या एक प्याला पैसे दो पैसे में खरीदता है, तो इस को बार बार मारता है, अगर अच्छी आवाज़ दे और फुटा टूटा ना हो तो खरीद लेता है वरना वापीस कर देता है। पस तू खुदा की तलब का दावा करता है तो तेरा इम्तेहान किए बगैर कैसे छोड़ें?"
(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 23)


