नक़ल है के कोई शक्स हज़रत महेदी अलै. से लिबास पा-पश तलब करता तो महेदी अलै. फरमाते के "लो बन्दे का जामा पहनो और बरकत के लिए घर में मत रखो अगर बन्दे का पोश्त पहनोगे (तो भी),जो कुछ बन्दा कहता है (उस पर) जब तक अमल ना करोगे नजात ना पाओगे।"
(हाशिया इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 59)


