मियाँ मुस्तफा रज़ी. से मनकुल है के हज़रत महेदी अलै. शहर मांडो में चंद रोज़ रहे और वहां हुजरे तैय्यार किए। एक बिरादर ने हुजरे के लिए चंद लकड़ियाँ खड़े कर के उन पर कपडा या बोरिया साया के लिए डाला था। एक शक्श महेदी अलै. की मुलाक़ात के लिए आया और उस साये के निचे मुलाक़ात कर के बैठा और कुछ फुतुह की।
उस के उठने के बाद हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया के "इस हुजरे को यहाँ से उठा लो अच्छी जगह नहीं है, क्यों के इस जगह अव्वल दुनिया की चीज़ आयी।"
हुजरे वहां से उठा लिए और दूसरी जगह कायम किए।
(हाशिया इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 25)


