अगर क़ुरआन को पढ़ने के तौर पर पढ़ा जाए

नक़ल है के खांबेल में बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. से मालिक बख्खान रज़ी. ने पूछा के "फलां शक्श क़ुरआन बहोत पढता है तो क्या पढ़ने से कुछ फ़ायदा होगा?"

इस के बाद बंदगी मियाँ रज़ी. ने फ़रमाया "अगर क़ुरआन को पढ़ने के तौर पर पढ़ा जाए तो भी बन्दे और ख़ुदा के दरमियान नूर का परदा पैदा होता है और खुदा के ज़िक्र से नूर का परदा फट जाता है।"

(हाशिया इंसाफ  नामा - मतन शरीफ,  न. 3)

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