और नेज़ हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया के "जो शक्स बहुत पढ़ता है, बहुत ज़लील होता है और दुनिया तलब करता है। और जो दुनिया तलब नहीं करता इस को ग़ुरूर बहुत होता है।"
इस के बाद हज़रत महेदी ने फ़रमाया के "जो कुछ बन्दा कहता है वैसा ही करो यानि खुदा ए ताला का ज़िक्र करो ताके खुदा ए ताला की बिनाई हासील हो।"
(हाशिया इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 24)


