नक़ल है के बंदगी मियाँ शाहे दिलावर रज़ी. एक रोज़ जंगल में जा रहे थे, वहां कब्र देखी उसी वक्त ख़ुदा-ए-ताला हुक्म हुआ के इस कब्र पर सवार हो तेरी जुतियों की गर्द उस पर पड़ेगी, मैं उसको अज़ाब से नजात दूंगा।
(80 नक़लियत हजरत बंदगी मियां सय्यद आलम रह. इब्ने बंदगी मियाँ सय्यद याकूब हसन-ए-विलायत रज़ी.)


