"हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह."

हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह. की विलादत बा सादत खांबेल (गुजरात) में ९६७ हिजरी में हुई। आप हज़रत बंदगी मियां सैयद मेहमूद सैदनजी खातिमुल मुरशिदीन रज़ी. के चौथे फ़रज़ंद हैं. वालिद बुजरुगवार के मुरीद व फ़कीर हैं, वालिद के सोहबत याफ़ता हैं। वालिद बुज़ुरूगवार के इन्तेकाल के बाद आप गुजरात से हिजरत फ़रमा कर दक्कन तशरीफ़ ले आए कुछ दिनों तक आप दौलताबाद में अपने बहनोई  हज़रत बनदगी मियां सैयद यूसुफ़ बारा बनी इसराईल रह. के पास तशरीफ़ फ़रमा रहे फिर यहां से (धारासिव) उस्मानाबाद तशरीफ़ ले गए। उस्मानाबाद यह इलाका उन दिनों सलतनते निज़ाम शाही के एक अमीर नवाब दरवेश मोहम्मद की जागीर थी। नवाब को हज़रत से बहुत इरादत व अकीदत थी, इसी अकीदते दीनी के तेहत नवाब दरवेश मोहम्मद अपनी लडकी का निकाह आप के फ़रज़ंद मियां सैयद ईसा से किया।

उस्मानाबाद के अलावाह दक्कन के बाज़ मकामात पर भी आप का क्याम रहालेकिन बहुत ही कलील मुद्दत का रहा। गुंजोटी, ऊदगीर और कूटगीर में आप ने अकामत फ़रमाई। सब से आखिर में आप का दाएरा मनचप्पा (निज़ामाबाद) में रहा। यहीं पर आप ने १७, मोहर्र्म १०३० हिजरी को विसाल फ़रमाया। मनचप्पा ही में आप का मज़ारे मुबारक वाके है। मनचप्पा का दाएरा फ़करो तवक्कल के ऎतेबार से बहुत आलियत और अज़ीमत का हामिल रहा, सिर्फ़ फ़ुकरा ही इस दाएरा में रहते थे कासिबीन को दाएरे के अंदर आने की इजाज़त नहीं थी।
हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह.अपने वालिदे बुज़ुरूगवार के बडे मनज़ूरे नज़र और चहीते फ़रज़ंद थे। आखरी वक्त आप रज़ी.(सैदनजी खातिमुल मुरशिदीन रज़ी.) ने उन्हें येह बशारत सुनाई "नूर भाई आखिर बन्दा तुझ में है".

हज़रत शाह कासिम रह. फ़रमाते हैं "खुदा ए ताला ने मियां मामू को इस लिये रखा है के हम लोगों को मालूम हो सके के दीने मेहदी अलै. क्या है, वरना हम जो कर रहे हैं उसी को दीन समझते।"

उमूरे दीन में हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह. की ज़ाते गिरामी हाकिमुज़ ज़मां है। आप की ज़ाते अकदस अपने दौर की साहिबे फ़ज़ल शखसियत रही है। ऎसा मालूम होता है के राहे दीन पर चलाने हाथ में कोड़ा उठा रखा है, जहां कोई गलती या लगज़िश सरज़द हुई बस कोड़ा पडा। बेटे, खलीफ़े और फ़ुकरा सब के साथ एक बरताऒ है। आप ने दीन में कभी तसाहल और तगाफ़ल को रवा नहीं रखा। जहां आईने फ़कीरी के खिलाफ़ कोइ बात देखी फ़ौरन तंम्बीह करदी बलके बाज़ वक्त दाएरा से बाहर कर दिया गया।
हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह. के १० खुलफ़ा ए गिरामी हैं, जिन में से ३ खुलफ़ा ऎसे हैं के जिन के फ़ैज़ से गिरोहे मेहदवीया के तकरीबन अहले तरीकत घराने बैहरामंद हैं।
वह ३ खुलफ़ा येह हैं,

(१) हज़रत बनदगी मियं सैयद आलम रह. बिन हज़रत शाह याकूब हसने विलायत रह.
(२)हज़रत बनदगी मियां शाह कासिम रह.
(३)हज़रत बनदगी मियां शाह नुसरत रह.

हज़रत बनदगी मियां सैयद नूर मोहम्मद रह.की पहली बीवी फ़ातिमा रह. हैं इन्के इन्तेकाल के बाद हज़रत बंदगी ताज मोहम्मद रह. की साहेब ज़ादी बीबी आजे साहेबा से आप का अक्द हुआ। जिन्से आप के ६ फ़रज़ंद ४ दुखतर हुए। इस के एलावह बीबी खां नामी एक बेवाह से निकाह निकाह फ़रमाया था जो हज़रत की बडी मनज़ूरे नज़र थीं।
फ़रज़ंदान:-
(१) हज़रत मियां सैयद अहमद रह.
(२) हज़रत मियां सैयद ईसा रह.
(३) हज़रत मियां सैयद अबदुल हई रह.
(४) हज़रत मियां सैयद अबदुल कादर रह.
(५) हज़रत मियां सैयद मुबारक रह.
(६) हज़रत मियां सैयद उस्मान रह.

Information of Peer O Murshid Allahbakhash Miyan Mehdavi (Chanapatan, Karnatak)

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