नकल है बंदगी मियाँ शाहे निज़ाम रज़ी. ने चन्द रोज बयान नहीं किया कोई शक्स बयान करने के लिए आप रज़ी. को नहीं कह सका. एक बिरादर ने इस में ईशारा किया के एक चीज थी उस से तमाम लोग फ़ायदा उठाते थे अब वह चीज पोशीदा हो गई लोग महरूम हो गए.
ये बात मियाँ शाहे निज़ाम रज़ी. ने सुनी और उसकी तरफ नज़र की और मियाँ चले गये. जब ओ होशियार हुआ तो उस से बिरादरों ने पुछा के क्या हाल है. उसने कहा के “हमारा मक्सद पूरा हो गया, क्या देखता हूँ के मियाँ रज़ी. ने हमको अपने साथ लेकर आलमे मलकुत जब्रुत व लहुत को दिखा दिया.”
(हाशिया इंसाफ नामा १९४)


