नकल है फ़जर (फज्र) के वक्त हजरत बंदगी मियाँ शाहे दिलावर रजी. ने हज़रत महेदी अलैहिसलाम से मुलाखात की उस वक्त हज़रत महेदी अलैहिसलाम तलकीन की, हज़रत महेदी अलैहिसलाम ने अपना हाथ मियाँ दिलावर रजी. के हाथ के उपर रखा और फरमाया “मुरिदुल्लाह हो.”
उसके मियाँ दिलावर रजी. का हाथ अपने हाथ पर रखकर फरमाया “मुरदुल्लाह हो.”
आपको सात साल जज्बा रहा मस्जिद में बैठे रहे उसके बाद हज़रत महेदी अलैहिसलाम की सोहबत में आये.
( हाशिया इंसाफ नामा २५४ )


