नक्ल है के एक रात अमीर ए अमिरान, पिर ए पिरान हज़रत मिरां अलैहिसलाम अपने चन्द असहाब के साथ तशरीफ फरमा थे इतने में हजरत बंदगी मियाँ दिलावर रजी. आए हजरत अलैहिसलाम ने पुछा कौन शक्स है? बिरादर ने जवाब दिया दिलावर है. या खुद मियाँ दिलावर जवाब दिया दिलावर है. तो हजरत महेदी अलैहिसलाम ने फरमाया दिलावर मत कहो शाहे दिलावर कहो.


