मुहाजिरों ने हज़रत महेदी अ.स. से अर्ज़ किया के...

मुहाजिरों ने हज़रत महेदी अ.स. से अर्ज़ किया के खुन्दकार के बाद हम सब आप अ.स. के मक़बरे के पास रहेंगे।

हज़रत महेदीअ.स. ने फ़रमाया हमारी क़बर खोल कर देखो अगर बन्दा क़बर में रहा तो बन्दा महेदी नहीं । हमारा मुद्दुआ (खुदा का ज़िक्र) तुम्हारे दरमियान रहे और तुम जहाँ कहीं  रहो बन्दा तुम्हारे दरमियान है।

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.77)

बंदगी मियाँ शाह निज़ाम रज़ी ने फ़रमाया..

बंदगी मियाँ शाह निज़ाम रज़ी ने फ़रमाया जो शक्स हिम्मत से खुदा की तलब इख़्तियार करता है तो इस के लिए बहुत आसानी होती है और जिस को हिम्मत ना हो बड़ी मुश्किल होती है।

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.89)

किसी शख्स ने बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. से अर्ज़ किया के...

किसी शख्स ने बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमिर रज़ी. से अर्ज़ किया के मर्दानगी और बहादुरी इन फकीरों की बुलन्द है।

मियाँ रज़ी ने फ़रमाया के ये फ़ुक़रा ज़ईफ़ हैं खुदा ए ताला के साथ सुलह कर लिए हैं खुदा की ख़ुशनूदी में अपनी ज़ात को खुदा के हवाले कर दिए हैं ।

तुम्हारी बहादुरी बहुत है खुदा और रसुल स.अ.स. और फरिश्तों का मुक़ाबला करते हो और दोज़ख़ का अज़ाब इख़्तियार करते हो तुम्हारी सुजात बड़ी है।

(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 43)

फरमान ए महेदी अलैहिस्सलाम..

हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया के दीन सरापा इंसाफ है, यानि तुम इंसाफ करो खुदा तुम पर रहम करे।

(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 8)

फरमान ए महेदी अलैहिस्सलाम..

हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया के अगर कोई शक़्स बन्दे से कोई नक़्ल करे तो चाहिए के  इस नक़्ल को देखे अगर खुदा ए ताला के कलाम के मुवाफ़िक है तो वो (नक़्ल) बन्दे से है और अगर  खुदा ए ताला के कलाम के मुवाफ़िक नहीं है तो वो बन्दे से नहीं है या वो शक़्स हमारी बात को समझ न सका।

(इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 11)

हज़रत महेदी अ.स. ने फ़रमाया के मेरी तस्दीक की निशानी ये है के...

हज़रत महेदी अ.स. ने फ़रमाया के मेरी तस्दीक की निशानी ये है के ना-मर्द मर्द होता है यानि तालिब-ए-दुनिया फिर तालिब-ए-खुदा ताला होता है। और बखिल सखी होता है यानि जो शख्स खुदा-ए-ताला की राह में एक दीनार नहीं दे सकता वही शक्स अपनी जान खुदा के हवाले कर देता है। और उम्मी आलिम होता है यानि जो शक्स एक हर्फ़ नहीँ जानता, क़ुरआन के मानी बयान करता है।

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.16)

फरमान ए महेदी अलैहिस्सलाम..

नेज़ हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने  फ़रमाया जो हमारे हैं वो मुफ़लिस मरेंगे।

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.25)

फरमान ए महेदी अलैहिस्सलाम..

नेज़ हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने  फ़रमाया "तुम को ग़िज़ा और हम को खुदा।"
(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.22)

फरमान ए महेदी अ.स.

नेज़ हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने  फ़रमाया के "इस को दुनियादार कहता है, काफिर क्यों नहीं कहता?"

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.21)

फरमान ए महेदी अ.स.

नक़ल है हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने गोजरी ज़बान में फ़रमाया के " दुनिया की तलब कुफ़्र है, दुनिया का तालिब काफिर है, खुदा का तालिब मोमिन है। खुदा का देखना मुमकिन है।"

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.20)

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