नक़ल है हज़रत महेदी अलैहिस्सलाम ने गोजरी ज़बान में फ़रमाया के " दुनिया की तलब कुफ़्र है, दुनिया का तालिब काफिर है, खुदा का तालिब मोमिन है। खुदा का देखना मुमकिन है।"
(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.20)