महेदी अलै. का अस्सी हजार तिनके लौटाना...

और नेज़ नक़ल है के मलीक अहमद इसहाक़ रज़ी. ने बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमीर रज़ी. से सुना है के जिस वक़्त हज़रत महेदी अलै. शहर बुध गए वहां एक सौदागर मुवाफ़िक था।

मियाँ सय्यद सलामुल्लाह रज़ी. किसी काम के लिए शहर गए थे, उस सौदागर के दरवाजे के सामने से बे-इख्तेयार आपका गुज़र हुआ, उस सौदागर ने मियाँ मजकुर के हाथ से अस्सी हजार तिनके महेदी अलै. को भेजा।

हज़रत महेदी अलै. ने कुबुल नहीं फ़रमाया, इसके बाद मियाँ सलामुल्लाह रज़ी. ने कहा मिरांजी खुदा-ए-ताला भेजा और पहुँचाया है।

हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया तुम किस लिए लाए? इसको खुदा का भेजा हुआ नहीं कहते, इसको हलाल कहते हैं व लेकिन हलाल ए तय्यब नहीं कहते।

( इंसाफ नामा - मतन शरीफ,  न. 17)

Previous Page Next Page Home