और नेज़ मियाँ फरीद मुहाजिर रज़ी. से मनकुल है हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया के "अगर कोई शक्स (तालिब-इ-मौला) अपने हुजरे में बैठा है और इस ने किसी के नालैन की आवाज़ सुनी और दिल में खयाल किया के शायद कोई शक्स फुतुह की चीज़ लाता है तो ये तवक्कुल न होगा।"
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 16)


