जिक्र की अहमियत

हज़रत भाई मुहाजीर रज़ी. से मनकुल है के हज़रत महेदी अलै. घर से हुजरे में दो तीन बार तशरीफ़ लाए और देखा के असहाब रज़ी. में से दो सहाबी रज़ी. एक जगह बैठे हुवे थे, फरमाया के "तुम क्या करते बैठे हो?" अर्ज़ किया के मीरांजी कुछ दीन की हिकायत करते हैं।
हज़रत महेदी अलै. ने फ़रमाया "भाइयों..! ज़िक्र ए ख़ुदा के सिवाए हिकायत से ख़ुदा न पाओगे।"

(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ,  न. 12)

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