और नेज़ बंदगी मियाँ सय्यद खुन्दमीर रज़ी. से मनकुल है के "अगर कोई शक्श रोटी की ग़रज़ से आलियात की जगह छोड़ कर दूसरे दायरे में जाये तो इस को दीन से कोई बहरा नहीं मिलेगा और ये (जाना) खुदा के लिए ना होगा।"
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 16)
( इंसाफ नामा - मतन शरीफ, न. 16)


