एक हर्फ़ का भी इन्कार....

और नेज़ नक़ल है के मीरां सय्यद मोहम्मद महेदी अलै. ने फ़रमाया के "जो हुक्म मैं बयान करता हूँ खुदा से (मालूमात  हुज़ूर ए खुदा से), हुक्मे खुदा से बयान करता हूँ। जो शक्स के इन अहकाम से एक हर्फ़ का (भी) मुनकिर हो वो अल्लाह ताला के पास मखुज होगा।"

(हाशिया इंसाफ  नामा - मतन शरीफ,  न. 3)

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