नकल है एक बन्दा-ए-खुदा की वफ़ात हुई औलिया अल्लाह से एक वली ने देखा के इस शक्स के दोनों पांओं जंजीर की एक कड़ी में बंधे हैं. पुछा के तेरे पैर इस तरह एक जगह क्यों बंधे गये हैं? उसने कहा “एक बार सेहत (तनद्रुरुस्ती) की हालत में रहकर भी नमाज़ की जमात में नहीं गया इस सबब से ऐसा किए.”
(नकलियत हज़रत बंदगी मियाँ सय्यद आलम रज़ी.)


