जब कोई भी शक्स इमाम महेदी अ.स. से आप का इस्तेमाल किए हुए “नलैन मुबारक” (जूते) या “कपड़ा मुबारक” बरकत लिए तलब करते थे. आप अ.स. उन्हें दे दिया करते और फरमाते थे, “इन चीजों इस्तेमाल करिये लेकीन घर में बरकत के मत राखिये, अगर आप लोग इस बन्दे की चमड़ी मुबारक भी पहनलोगे तो भी जहन्नम के आज़ाब से नहीं बचोगे, हां अगर मेरे बताए हुए रास्ते इख़्तियार (अमल) करो”
बा अमल मकबुल
बे अमल मरदुद
बा अमल मकबुल
बे अमल मरदुद

