नक़ल है हज़रत महेदी अ.स. ने गोजरी ज़बान में फ़रमाया के जो शक्स ये समझता है के मैं भी कुछ हूँ, तो इस को समझ के वो कुछ भी नहीँ है और जो शक्स ये समझता है के मैं कुछ नहीं हूँ, तो इस में अल्लाह की मोहब्बत है।
(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.31)
(हाशिया इंसाफ नामा - हाशिया शरीफ, न.31)


