इमामना अलै. की उम्रे मुबारक 63 बरस को पहोंची तो 19 जिल्कद 910 हिजरी बरोज पीर आप इस दुनिया-ए-फानी से रूख्सत हुए । जब आप बिस्तर पर लेटे हुए थे, तो हजरत शाह नेमत रजी. रोने लगे ।
आपकी आवाज़ सुनकर इमामना अलै. ने फरमाया " मियाँ नेमत ये रोने का वक्त नहीं है तुम जब तक करते रहोगे बन्दा तुम में मौजूद है रो तब तुम में अमल बाकी न रहे।"


