हज़रत बन्दगी मियां शाह दिलावर रजी. से नक़ल है कि हज़रत महेदी अले० ने फ़रमाया बन्दा माँ के पेट से बाहर होते ही मुझको फ़र्माने ख़ुदा  हुवा की वही अव्वल वही आख़र वही ज़ाहिर वही बातिन ओर यह भी फ़रमाया कि उसी वकत बन्दे को ख़ुद हक तआला ने चारों किताबो कि तालीम दी।अगर बन्दा तौरेत पढ़ता तो लोग हैरान होकर कहेते के तुझको कैसे मालूम हुवा ओर समझते कि फिर मूसा अले० का जुहूर हुवा मगर बन्दे ने हज़म किया। अगर बन्दा इन्जील पढ़ता तो लोग कहते कि मसीह इब्ने मर्यम का दुबारा जुहूर हुवा हैं इसी तरह अगर बन्दा ज़बुर पढ़ता तो कहते कि दाऊद अले० है। अगर बन्दा कलामुल्लाह पढ़ता तो कहते कि यह मर्दे अजीज मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्ला० है कि दुबारा ज़ुहूर फ़रमाया है ओर लोग शक व शुबा में पड़जाते ओर आम व ख़ास नबूवत का इक़रार करने लगते लेकिन बन्दे ने अल्लाह तआला की तौफ़ीक से हज़म किया इस लिये कि हक़ तआला ने बन्दे को मुहम्मद सल्ला० की विलायत का बोझ उठाने के लिये पैदा किया है।
किताब. :: मौलूद
सीरत मूबारक हज़रत इमाम महेदी मौउद अले.

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