नेज़ महेदी अ.स. ने फ़रमाया के अगर बन्दा खिलवत में क़ुरान का मुतालिया करके मायने सोंच कर बहार आता और बयान करता है तो बन्दा ज़ालिम और अल्लाह पर बोहतान लाने वाला होगा. बन्दा जो कुछ कहता है, करता और पढ़ता है, जो आयत भी बन्दे को दिखाएँ बन्दा पढ़ता है. और जैसे बयान की तालीम (अल्लाह ताला) बन्दे को दे बयान करता है. उल्लिम्तु मिनल्लाही बिला वास्तातीन जदीदल यौम (मुझे अल्लाह की जानिब से रोजाना बिलावास्ता तालीम हुवा करती है) बन्दे का हाल है.


