हजरत बंदगीमियाँ शाह ए याकुब रजी. (दौलताबाद)
एक दिन आप रजी जंगल में सफर मे थे. एक मुखाम पर सब को लेकर जिक्र में बैठ गये. उस तरफ से बादशा अपने सिपायों के साथ जा रहा था. बादशा आगे निकल गया अपनी फौज के साथ. एक सिपहि पिछे रह गया था. वो भागते आया उसको समझ नहीं आ रहा था, उसके साथी किस तरफ गये. उसने हजरत को और उनकी जमात को देखा जिक्र मे, उसने आकर हजरत से पुच्छा हमारा बादशा कहा है ? किधर गया? हजरत ने कहा उस तरफ गया उधर जा.. उसके जाने के बाद शाह याकुब रजि. ने अपने साथींयो से कहा "उसने मुझे इस दुनिया के बादशा का पता पुछा किधर गया है. अगर मुझसे ये पुछता के हमारा हक़ीकी बादशा अल्लाह कहां है ? तो मैं उसको अभी यहीं मिला देता"
नेज नकल है के हजरत महेदी अ.स. ने तर्क-ए-वजुद को अमल-ए-सालेह फरमाया.


